अमृतसर
अमृतसर में आज शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने फिल्म 'सतलुज' पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में विशाल रोष मार्च निकाला। यह फिल्म भाई जसवंत सिंह खालड़ा की शहादत और सिखों के साथ हुई कथित ज्यादतियों पर आधारित है।
मार्च का नेतृत्व एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने किया। गोल्डन टेंपल परिसर स्थित सूचना केंद्र से शुरू हुआ यह मार्च डिप्टी कमिश्नर कार्यालय की ओर बढ़ा। इसमें एसजीपीसी सदस्य, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जो हाथों में बैनर लेकर नारेबाजी कर रहे थे।
14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे अरदास
मार्च के डीसी कार्यालय पहुंचने पर जिला प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक मांगपत्र सौंपा जाएगा। एडवोकेट धामी ने बताया कि रोष मार्च के बाद 14 जुलाई को सतलुज नदी के किनारे अरदास भी की जाएगी। मार्च शुरू होने से पहले धामी ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब के उस दौर की सच्चाई उजागर करने का प्रयास किया था, जिसके लिए उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। उनके जीवन पर बनी यह फिल्म सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद 'सतलुज' नाम से तैयार हुई थी, लेकिन अब इसके प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी गई है।
नई पीढ़ी उस इतिहास से अनजान
धामी ने तर्क दिया कि 1995 का दौर देखने वाले ही उस समय के हालात को समझ सकते हैं, जबकि आज की नई पीढ़ी उस इतिहास से अनजान है। उन्होंने मांग की कि फिल्म पर लगी रोक हटाई जानी चाहिए, ताकि लोग उस समय की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित हो सकें।
इतिहास और सच्चाई को सामने लाने का मुद्दा
उन्होंने जोर दिया कि यह केवल एक फिल्म का नहीं, बल्कि इतिहास और सच्चाई को सामने लाने का मुद्दा है। SGPC इस प्रतिबंध के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रही है और सरकार से फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग कर रही है। अपने संबोधन में धामी ने लंबे समय से जेल में बंद सिख बंदियों का मुद्दा भी उठाया और सरकार से ऐसे मामलों में उचित निर्णय लेने का आग्रह किया।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad

