स्वच्छ भारत मिशन पर सरकार का फोकस, मंत्री पटेल ने दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश

मध्य प्रदेश राज्य

स्वच्छ भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक कार्य योजना करें तैयार: मंत्री पटेल

कचरा संग्रहण, निष्पादन एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बनाएं स्पष्ट नीति
स्वच्छता व्यवस्था में स्कूलों, पंचायतों, विभागों और क्लस्टर आधारित मॉडल के समन्वय पर करें फोकस

भोपाल 
पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की साधारण सभा की बैठक में कहा कि स्वच्छता केवल अभियान नहीं, बल्कि सतत जनभागीदारी और सुव्यवस्थित प्रबंधन का विषय है। उन्होंने निर्देश दिए कि कचरा संग्रहण एवं निष्पादन के लिए स्पष्ट नीति तैयार की जाए तथा पंचायतों, ब्लॉक स्तर और क्लस्टर स्तर पर दायित्वों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए। मंत्री पटेल ने कहा कि 10 हजार से अधिक आबादी वाली ग्राम पंचायतों में ठोस एवं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए तथा अगले 20 वर्षों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर कचरा निष्पादन प्रबंधन के उपाय करें। उन्होंने कचरा परिवहन के लिए वाहनों, एजेंसियों और संचालन व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित करने पर बल दिया।

मंत्री पटेल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों को क्लस्टर आधारित स्वच्छता व्यवस्था से जोड़ा जाए तथा डस्टबिन के प्रभावी उपयोग, "वॉश ऑन व्हील्स" मॉडल, सामुदायिक स्वच्छता परिसरों और गोबर-धन परियोजनाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने सीएसआर मद का उपयोग कचरा निष्पादन इकाइयों के विकास में करने, मल-कीचड़ एवं सेप्टेज प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने तथा खुले में कचरा डंपिंग की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के निर्देश दिए। मंत्री पटेल ने कहा कि भुगतान व्यवस्था के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की जाए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि एक अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू किए जा चुके हैं तथा राज्य और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। प्रदेश में कचरा प्रबंधन के लिए वर्कफ्लो मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया जा रहा है। "वॉश ऑन व्हील्स" अभियान के अंतर्गत 1,924 क्लस्टरों में कार्य संचालित हैं तथा 9 हजार से अधिक पानी की टंकियों की सफाई की जा चुकी है। बैठक में प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन के वार्षिक लक्ष्यों, सामुदायिक स्वच्छता परिसरों, गोबर-धन परियोजना तथा प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की प्रगति की समीक्षा भी की गई। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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