फतेहगढ़ साहिब
पंजाब में इस बार मानसून का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी तेज बारिश तो कभी कई दिनों तक सूखा जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं। प्री-मानसून की कमजोर शुरुआत के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जुलाई में लगातार बारिश होगी, लेकिन मानसून फिलहाल 'ऑन-ऑफ' मोड में नजर आ रहा है।
यही कारण है कि एक ओर तापमान फिर बढ़ने लगा है तो दूसरी ओर उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। खेतों से लेकर शहरों तक इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को राज्य के औसत अधिकतम तापमान में पिछले दिन की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि तापमान अभी सामान्य के आसपास बना हुआ है।
बठिंडा में तापमान 40 डिग्री के करीब पहुंचा
राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान बठिंडा में 39.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पटियाला में 37.1 डिग्री, बठिंडा में 37.6 डिग्री, अबोहर में 36.8 डिग्री, लुधियाना में 35.6 डिग्री, फिरोजपुर में 35.3 डिग्री, मोहाली में 34.6 डिग्री, फरीदकोट में 34.6 डिग्री, रूपनगर में 34.3 डिग्री, जालंधर में 33.4 डिग्री, होशियारपुर में 33.6 डिग्री, पठानकोट में 33.1 डिग्री, अमृतसर में 32.9 डिग्री और गुरदासपुर में 32.0 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।
आज 18 जिलों में बारिश की संभावनाएं
14 जुलाई: मंगलवार को अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, कपूरथला, जालंधर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, फिरोजपुर, फरीदकोट, मुक्तसर और फाजिल्का समेत 18 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है। हालांकि मौसम विभाग ने किसी भी जिले के लिए भारी बारिश या आंधी का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है।
15 जुलाई: पूर्वानुमान के अनुसार बुधवार को बारिश का दायरा और सिमट जाएगा तथा मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी जिलों में ही हल्की बारिश हो सकती है।
16-17 जुलाई: वीरवार को भी यही स्थिति रहने की संभावना है। इसके बाद 17 जुलाई को कुछ और जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
18-19 जुलाई: मौसम विभाग का अनुमान है कि 18 और 19 जुलाई के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ अपेक्षाकृत अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आने के आसार हैं।
प्री-मानसून रहा कमजोर
इस बार प्री-मानसून भी सामान्य से काफी कमजोर रहा। 1 जून से अभी तक 85.4 मिमी बारिश हुई है, जबकि समान्यता ये 117.8 मिमी हो जानी चाहिए थी। यानीकि, सामान्य से 28 फीसदी कम रही है।
जुलाई की शुरुआत में भी बारिश सामान्य से कम रही। जुलाई में अभी तक 56.4 एमएम बारिश हुई है, जबकि 63.3 एमएम बारिश हो जानी चाहिए थी, जो सामान्य से 11 फीसदी कम है।
बिजली खपत पर भी असर
मानसून की धीमी चाल का असर बिजली खपत पर भी दिख रहा है। बारिश रुकते ही गर्मी और उमस बढ़ने से बिजली की मांग फिर बढ़ने लगी है। वहीं जिन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां किसान सिंचाई के लिए ट्यूबवेल का अधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में बिजली की खपत बढ़ रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हल्की बारिश से खेतों में नमी बनी रहेगी, लेकिन यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को अतिरिक्त सिंचाई करनी पड़ सकती है। वहीं अधिक उमस रहने पर धान में झुलसा और तना छेदक रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। किसानों को मौसम के अनुसार ही खाद और दवाइयों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
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