सरकारी स्कूलों के भवनों का तैयार होगा डिजिटल नक्शा, सुविधाओं की होगी सटीक योजना

राज्य

 फतेहाबाद
 सरकारी स्कूलों के भवनों का अब डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जाएगा। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (एचएसएसपीपी) ने निर्देश जारी कर स्कूलों के भवन, कक्ष, शौचालय, खेल मैदान, बाउंड्रीवाल, मुख्य द्वार, खाली भूमि सहित पूरे परिसर का डिजिटल लेआउट प्लान तैयार कराने के आदेश दिए हैं।

यह कार्य आर्किटेक्ट के माध्यम से आटोकैड सफ्टवेयर पर कराया जाएगा। डिजिटल मैपिंग पूरी होने के बाद भविष्य में भवन निर्माण, अतिरिक्त कमरों, मरम्मत और अन्य विकास कार्यों की योजना अधिक सटीक तरीके से बनाई जा सकेगी।

जिले में 620 सरकारी स्कूल है जहां यह नक्शा तैयार होगा। कई स्कूलों के पास अब तक भवनों का अद्यतन लेआउट उपलब्ध नहीं था, जिससे निर्माण और मरम्मत कार्यों में समय लगता था। डिजिटल ब्लूप्रिंट तैयार होने के बाद प्रत्येक स्कूल का पूरा नक्शा आनलाइन उपलब्ध रहेगा।

इससे नए कमरे, प्रयोगशाला, शौचालय, खेल मैदान और अन्य सुविधाओं के निर्माण की योजना तेजी से बनाई जा सकेगी। साथ ही पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस भी तैयार होगा।

यह तय की गई राशि
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल इस कार्य का खर्च कामन स्कूल वेलफेयर फंड अथवा अन्य उपलब्ध स्वीकृत फंड से कर सकेंगे। इसके लिए विभाग ने सभी तकनीकी कार्यों की मानक दरें भी निर्धारित कर दी हैं।

स्ट्रक्चरल ड्राइंग एवं डिजाइन के लिए 2.50 रुपये प्रति वर्ग फुट, सिविल कार्यों के विस्तृत एस्टीमेट के लिए 1.15 रुपये प्रति वर्ग फुट, पब्लिक हेल्थ एवं इलेक्ट्रिकल एस्टीमेट के लिए 2.05 रुपये प्रति वर्ग फुट, प्रूफ चेकिंग एवं कंसल्टेंसी के लिए 1.50 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित किए गए हैं।

वहीं ऑटोकैड ट्रेसिंग 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर, ए-3 आकार की ड्राइंग प्रिंट 40 रुपये प्रति प्रिंट तथा स्टील व बार बेंडिंग शेड्यूल 1.25 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से तैयार किया जाएगा।

बाउंड्रीवाल और जमीन का भी होगा सर्वे
विभाग ने बाउंड्रीवाल के विस्तृत प्लान के लिए 12 हजार रुपये प्रति सेट निर्धारित किए हैं। वहीं स्कूल परिसर के टोटल साइट सर्वे की दर 150 रुपये प्रति 100 वर्ग मीटर तय की गई है।

यदि किसी स्कूल में नए भवन निर्माण की आवश्यकता होगी तो वहां 10 मीटर तक जियोटेक्निकल जांच के लिए 12,500 रुपये, 10 से 15 मीटर तक 14 हजार रुपये तथा 15 मीटर तक 14,500 रुपये खर्च किए जाएंगे। इन दरों के अनुसार ही स्कूल तकनीकी एजेंसियों या आर्किटेक्ट से कार्य करवा सकेंगे।

अब जाने क्यों उठाए गए कदम
पिछले साल कंडम भवन होने के कारण अनेक जगह पर हादसे हुए थे। बरसात के कारण स्कूलों में पानी भर गया था। उसके बाद विभाग ने कदम उठाया और कंडम भवनों को गिराने का फैसला लिया गया था।

उन स्कूलों का सुधार तो हो गया है, लेकिन अब सभी स्कूलों का ब्लूप्रिंट तैयार करवाया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। जिस स्कूल में कमरे बनाने होंगे तो उच्चाधिकारी अपने आप ही संज्ञान ले लेंगे और बजट भी जारी हो जाएगा।

जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति
फतेहाबाद की जिला शिक्षा अधिकारी संगीता बिश्नोई ने कहा कि सभी स्कूलों को निर्धारित प्रारूप के अनुसार समयबद्ध तरीके से डिजिटल लेआउट तैयार कर जिला कार्यालय के माध्यम से मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं। लेआउट से पता चल जाएगा कि किस सरकारी स्कूल में क्या कमी है। उसे तुरंत दूर किया जा सकता है।

 

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