पणजी
हर साल अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही गोवा में चार्टर्ड पर्यटकों का आगमन, होटलों की बुकिंग, नवविवाहित जोड़ों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। लेकिन इसके साथ ही सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों की बौछार भी देखने को मिलती है।
पिछले दो सालों में अपनी छवि पर लगे झटकों के बाद, इस बार गोवा पर्यटन विभाग ने केवल बचाव करने के बजाय आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया है। विभाग के अनुसार, आगामी पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले राज्य में एक विशेष वॉर रूम स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।
क्या है वॉर रूम का उद्देश्य?
आधिकारिक तौर पर इसे गोवा टूरिज्म ऑनलाइन रेप्युटेशन मैनेजमेंट सेंटर कहा जाएगा। इस वॉर रूम को स्थापित करने और संचालित करने के लिए विभाग एक निजी एजेंसी की नियुक्ति के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर चुका है।
इसका मुख्य उद्देश्य गोवा के पर्यटन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक, अतिरंजित, नकारात्मक या असत्यापित कंटेंट की निगरानी करना और उस पर रियल-टाइम एक्शन लेना है।
विभाग का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन रिव्यू, इन्फ्लुएंसर्स और वीडियो के जरिए पर्यटकों की धारणा तय होती है, ऐसे में इन भ्रामक खबरों से राज्य की छवि को भारी नुकसान पहुंचता है।
प्लेटफॉर्म्स पर रखी जाएगी पैनी नजर
एजेंसी का काम ऑनलाइन सेंटिमेंट, सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं और हानिकारक कंटेंट की रियल-टाइम निगरानी करना होगा। सितंबर से अप्रैल तक चलने वाले 9 महीने के पूरे पर्यटन सीजन के दौरान एक समर्पित टीम एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ट्रैवल पोर्टल्स, ब्लॉग्स और रिव्यू साइट्स को ट्रैक करेगी।
यह निगरानी अंग्रेजी, हिंदी, कोंकणी और मराठी भाषाओं में की जाएगी। इसके अलावा, नियुक्त एजेंसी को रोजाना सरकारी दफ्तर खुलने से पहले अधिकारियों को एक विस्तृत मॉर्निंग ब्रीफ सौंपनी होगी, जिसमें इंटरनेट पर गोवा के खिलाफ चल रहे नकारात्मक समाचार, वायरल वीडियो, इन्फ्लुएंसर्स की आलोचनाओं, ऑनलाइन शिकायतों और अफवाहों का पूरा ब्योरा शामिल होगा।
आखिर क्यों पड़ी वॉर रूम की जरूरत?
इस वॉर रूम को स्थापित करने का समय महज इत्तेफाक नहीं है। हाल के दिनों में भले ही गोवा के समुद्र तटों पर पर्यटकों की आवाजाही वापस पटरी पर लौटी है, लेकिन राज्य को पिछले एक साल से लगातार बैड प्रेस और नकारात्मक प्रचार का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यटक अक्सर अत्यधिक किराए और स्थानीय टैक्सी चालकों द्वारा ऐप-आधारित टैक्सियों को रोकने के लिए की जाने वाली मनमानी की शिकायत करते हैं।
इसके अलावा निवासियों को बीचों पर अत्यधिक भीड़, ट्रैफिक जाम, कचरे के ढेर और पर्यटकों की लापरवाही से गाड़ी चलाने जैसी समस्याएं परेशान करती हैं।
वहीं, पर्यटक खुद पीक सीजन में होटलों के महंगे टैरिफ और खाने के भारी-भरकम बिल से नाराज रहते हैं। ऐसे में बीच-बीच में वायरल होने वाले स्कैम के वीडियो ने विभाग को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
बिना सरकारी स्वीकृति के नहीं दिए जाएंगे जवाब
विभाग के नोट में स्पष्ट किया गया है कि यह एजेंसी डिजिटल लिसनिंग, सेंटिमेंट ट्रैकिंग, अलर्ट जारी करने और विभाग के अपने चैनलों पर हानिकारक कंटेंट के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगी, ताकि ब्रांड गोवा को सुरक्षित और मजबूत रखा जा सके।
हालांकि, पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि निजी एजेंसी को अपने स्तर पर कोई भी बयान या प्रतिक्रिया देने का अधिकार नहीं होगा। किसी भी नकारात्मक टिप्पणी का खंडन, स्पष्टीकरण या जवाब देने से पहले गोवा पर्यटन विभाग से उसकी लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
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