IAS अफसर पर कार्रवाई की खबर सामने आते ही अक्सर सवाल उठता है कि आखिर किसी अधिकारी को सस्पेंड करने का अधिकार किसके पास होता है और इसके लिए क्या नियम हैं? क्या राज्य सरकार अपने स्तर पर किसी IAS अधिकारी को निलंबित कर सकती है या केंद्र की मंजूरी भी जरूरी होती है? दरअसल, IAS अधिकारियों के निलंबन की प्रक्रिया से जुड़े अक्सर कई सवाल सामने आते हैं. हालांकि, इसकी प्रक्रिया आसान नहीं होती है.
क्या है IAS के सस्पेंशन का नियम?
ऑल इंडिया सर्विसेस डिसिप्लिन एंड अपील नियम 1969 के तहत तय होती है. नियमों के मुताबिक अधिकारी जिस सरकार के अधीन काम कर रहा है, परिस्थितियों के अनुसार वही सरकार निलंबन का आदेश जारी कर सकती है. हालांकि, केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों को लेकर नियमों में अलग-अलग प्रावधान हैं. इसमें बताया गया है कि सस्पेंड करने से पहले कारण बताना जरूरी होता है. इसके बाद इसकी जानकारी काडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी को देनी होती है. इसके अलावा सस्पेंड करने के 15 दिनों के भीतर सस्पेंशन की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी होती है.
क्या है 30 दिनों वाला नियम?
नियम ये भी कहते हैं कि राज्य सरकार किसी भी IAS अधिकारी को केवल 30 दिनों के लिए ही सस्पेंड कर सकती है. लेकिन अगर इसे और आगे बढ़ाना है, तो केंद्र सरकार से परमिशन लेनी होती है. लेकिन अगर वहीं, कोई अधिकारी केंद्र सरकार के अधीन काम करता है, तो सेंट्रल रिव्यू कमेटी के सुझाव पर ही उन्हें सस्पेंड किया जा सकता है.
सस्पेंशन में मिलती है प्रोटेक्शन
लेकिन कई बार अधिकारी को आर्टिकल 311 के तहत सीधे सस्पेंशन से प्रोटेक्शन भी दिया जाता है. इस नियम में साफ कहा गया है कि किसी भी अधिकारी को केवल वही की अथॉरिटी हटा सकती है, जिसने उन्हें नियुक्त किया है.
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