चंडीगढ़.
पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े आठ लाख रुपये रिश्वतकांड का पूरा सच अब 24 सितंबर को सामने आएगा। शिकायतकर्ता मंडी गोबिंदगढ़ के व्यापारी आकाश बत्ता पहली बार चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में गवाही देने पहुंचेंगे।
अदालत ने बत्ता को समन जारी किया है। रिश्वत मामले में आरोप तय होने के बाद अब शिकायतकर्ता की गवाही मुकदमे की अहम कड़ी मानी जा रही है। सीबीआई के अनुसार, बत्ता ने शिकायत दी थी कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे आठ लाख रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी।
हाईकोर्ट और विशेष सीबीआई अदालत से पहले लग चुका है झटका
भुल्लर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 10 अगस्त के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले 10 अप्रैल को भी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। तब अदालत ने उन्हें यह छूट दी थी कि यदि दो महीने के भीतर ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो वे दोबारा हाईकोर्ट जा सकते हैं। वहीं, जनवरी में चंडीगढ़ स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने भी भुल्लर को जमानत देने से साफ मना कर दिया था।
रोपड़ रेंज में तैनाती और पांच लाख रुपये की रिश्वत का आरोप
यह विवाद पिछले साल अक्टूबर में सामने आई एक शिकायत से जुड़ा है। उस समय भुल्लर रोपड़ रेंज के डीआईजी के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने सरहिंद पुलिस थाने में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में अनुकूल व्यवहार और राहत देने के बदले एक निजी बिचौलिए के जरिए घूस की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एफआईआर दर्ज कर पिछले साल 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ में जाल बिछाया। इस कार्रवाई के दौरान एक सह-आरोपी को रिश्वत की तय रकम में से पांच लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। इसके बाद सीबीआई ने भुल्लर को गिरफ्तार कर लिया, जिसके चलते उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया था।
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