एक तरफ केन-बेतवा से पानी की आस, दूसरी तरफ 70 साल पुराना तनाव; MP-UP में जल की दो तस्वीरें

फर्श से अर्श तक

छतरपुर 
 मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में पेयजल व सिंचाई के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट पर काम तीव्र गति से चल रहा है. ये परियोजना 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य. वहीं, एक ऐसी परियोजना भी है, जिस पर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के दो जिलों के किसानों के बीच 7 दशक से तनाव व्याप्त है। 

बांध हमारा तो पानी तुम्हारा क्यों?
सिंचाई के मौसम में रनगुवां डैम का पानी लेने के लिए छतरपुर व बांदा जिले के किसान आमने-सामने आ जाते हैं. दोनों जिलों के किसानों के बीच ये विवाद करीब 7 दशक से चल रहा है. अब फिर रबी फसल की सिंचाई का मौसम सामने है, ऐसे में दोनों जिलों के किसान फिर आमने-सामने हैं और प्रशासन इनके सामने असहाय की मुद्रा में. ये डैम बना तो छतरपुर जिले में है लेकिन अधिकांश पानी पर हक बांदा जिले का है। 

डैम पर पूरा नियंत्रण उत्तर प्रदेश के पास
बीते दो साल छोड़ दिए जाएं तो मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका सूखे के लिए बदनाम रहा है. इसलिए यहां पानी को लेकर हमेशा युद्ध जैसी स्थिति रहती है. छतरपुर में आधा दर्जन से अधिक बांध होने के बावजूद सिंचाई साधनों की कमी है. रनगुवां बांध छतरपुर जिले में होने के बावजूद इसका पानी उत्तर प्रदेश के खेतों के लिए अमृत बना हुआ है. छतरपुर जिले के किसान हर साल सिंचाई के पानी के लिए तरसते हैं। 

छतरपुर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर राजनगर इलाके से निकली केन की सहायक पर रनगुवां डैम बना है. इस डैम का निर्माण 1957 में एमपी और यूपी के संयुक्त उपक्रम के रूप में किया गया. ये बांध भले ही मध्य प्रदेश के छतरपुर सीमा में है लेकिन इसका प्रशासनिक नियंत्रण और रखरखाव उत्तर प्रदेश का बांदा जिले का सिंचाई विभाग करता है। 

किसानों में फिर रोष, आंदोलन की चेतावनी
छतरपुर के रनगुवां के किसान कमलेश रैकवार कहते हैं "बांध उनके क्षेत्र में होने के बावजूद उनके हक का पानी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती गांवों में जाता है. यूपी के बांदा जिले को पानी ज्यादा दिया जाता है, जिससे यहां के किसानों की फसलें सूखने लगती हैं. हमारे हिस्से का पानी भी यूपी के किसान निकालते हैं. हम लोगों की खेती समय से नहीं हो पाती। 

कम बारिश होने की स्थिति में बांध में पानी का स्तर कम होता है, तब यह विवाद उग्र होने लगता है. छतरपुर जिले के किसान संघ के अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद पटेल कहते हैं "यह विवाद पीढ़ियों से चला आ रहा है. कई बार यह मुद्दा किसानों ने उठाया है. छतरपुर जिले की सीमा में बांध बना है लेकिन यहां किसानों को पानी नहीं मिल रहा. अब किसानों के पास आंदोलन के अलावा कोई चारा नहीं है. किसानों को उनके हक का पानी मिलेगा। 

52 साल पहले हुआ था दोनों राज्यों के बीच एग्रीमेंट
रनगुवां डैम के पानी के बंटवारे को लेकर एग्रीमेंट 1 अगस्त 1972 को हुआ था. उस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रकाश चंद सेठी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलपति त्रिपाठी ने इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे. अनुबंध के अनुसार रनगुवां डैम का 30 प्रतिशत पानी मध्य प्रदेश के छतरपुर और 70 प्रतिशत पानी यूपी के बांदा को मिल रहा है। 

रनगुवां के किसान मुन्ना अहिरवार कहते हैं "जब सिंचाई का सीजन शुरू होता है तो यूपी वाले पानी रोक देते हैं. हम लोगों की फसल चौपट हो जाती है. कई बार आवाज उठाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ." छतरपुर के जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री राकेश वर्मा कहते हैं राजनगर इलाके में बने रनगुवां बांध से राजनगर इलाके के 35 गांवों मे सिंचाई होती है. यूपी के बांदा जिले के लगभग 95 गांवों की खेती को रनगुवा बांध पानी देता है. रनगुवा बांध की लंबाई 2 हजार 72 मीटर और ऊंचाई 27.400 मीटर है. इसकी जलभराव क्षमता 155 MCM है। 

केन-बेतवा लिंक परियोजना पूरी होने पर खत्म होगा विवाद
रनगुवां डैम के पानी वितरण को लेकर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच दशकों से चला आ रहा तनाव केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम पूरा होने के बाद खत्म होने की संभावना है. इस परियोजना पर काम तेज गति से चल रहा है. छतरपुर के ADM विनय द्विवेदी कहते हैं " केन-बेतवा लिंक परियोजना से सूखे बुन्देलखंड में पानी के संकट से लोगों को छुटकारा मिलेगा. किसानों के खेतों में हरियाली लहराएगी. परियोजना वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है. परियोजना की कुल लागत ₹44,605 करोड़ रुपये है. परियोजना के तहत केन नदी पर 96.7 मीटर ऊंचा और 2 से 2.5 किमी चौड़ा डैम बनेगा। 

सिंचाई के अलावा पेयजल संकट सुलझेगा
केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश के 10 जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर और उत्तरप्रदेश के 4 जिलों में 2.51 लाख हेक्टेयर मिलाकर कुल 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी. दोनों राज्यों के करीब 65 लाख लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी. MP के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, सागर, दमोह, दतिया, विदिशा, शिवपुरी, रायसेन और UP जिले बांदा, महोबा, झांसी और ललितपुर जिलों के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना वरदान साबित होगी। 

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