राजमहल
बीसलपुर बांध में मछली ठेके को लेकर करीब छह माह से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म होने की राह पर है। उच्च न्यायालय की ओर से रोक हटाए जाने के बाद मत्स्य विभाग ने बांध में मत्स्य ठेके के लिए नए सिरे से निविदा जारी कर दी है। निविदा में सालाना पांच करोड़ रुपए से अधिक की न्यूनतम राशि निर्धारित की गई है। इससे बांध के जलभराव क्षेत्र में मछली पकड़ने और इससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों के फिर से व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि बीसलपुर बांध में मत्स्य आखेट को लेकर गत मार्च में पूर्व संवेदक की ओर से राशि जमा नहीं करवाने तथा जनहित याचिका के चलते राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब छह माह तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। न्यायालय की रोक हटने के बाद विभाग ने अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। बीसलपुर बांध में मत्स्य ठेके से सरकार को हर साल करीब पांच से छह करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। ठेका प्रक्रिया अटके रहने से अब तक करीब ढाई से तीन करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
रोक हटी, फिर भी लैंडिंग सेंटर पर सामान का जमावड़ा
राजस्थान हाईकोर्ट की रोक हटे करीब एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन बीसलपुर बांध के मत्स्य लैंडिंग सेंटर पर अभी भी पूर्व संवेदक का सामान जमा है। सेंटर पर दर्जनों नावें, मोटर बोट सहित अन्य सामान पड़े हुए हैं। लंबे समय से सामान नहीं हटाए जाने से लैंडिंग सेंटर के उपयोग और व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नोटिस देकर सामान हटवाने की तैयारी
मत्स्य विभाग टोंक के बीसलपुर बांध विकास अधिकारी मदन सिंह ने बताया कि न्यायालय की रोक हटने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लैंडिंग सेंटर पर पूर्व संवेदक का सामान पड़ा होने के संबंध में जल्द नोटिस जारी कर सामान हटवाने की तैयारी की जा रही है।
बीसलपुर बांध की इन मछलियों की मांग अधिक
बीसलपुर बांध से मत्स्य विभाग को प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलता है। बांध में मछली पकड़ने का ठेका 5 वर्षों के लिए होता है, जिसमें हर साल 12 फीसदी राशि बढ़ा दी जाती है। मछली पालन का ठेका 2 साल से नहीं हो पाया। मामला हाईकोर्ट मे विचाराधीन होने से सरकार को करीब 10 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
बीसलपुर बांध में एक मछली एक बार में हजारों अंडे देती हैं। अंडे देने के दौरान मत्स्य विभाग की ओर से मत्स्य आखेट पर रोक लगाई जाती है। विदेशी व फार्मी मछली के तौर पर टाइगर, कोमलकार, सिल्वर, सिलोन, गिलासकार आदि प्रजाति की मछलियां पाई जाती है। जिनका बीज विभाग व ठेकेदार की ओर से डाला जाता है। मंडियों में इनके दाम देशी की अपेक्षा कम लगते हैं। सिंघाड़ा, लैची, बाम, समल आदि होती है, जिसमें कांटे कम होने से अधिक दामों पर बिकती है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
