जोशीमठ आपदा पर बोलीं Uma Bharti-पॉवर माफिया देश को कर रहा बर्बाद, रद्द किए जाएं सभी प्रोजेक्ट

राजनीती

भोपाल
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती इन दिनों सरकार पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं। उत्तराखंड में प्रकृति से हो रही छेड़छाड़ को लेकर जारी देशव्यापी चिंता और चर्चा के बीच नमामि गंगे प्रोजेक्ट की मंत्री रह चुकी उमा भारती ने मांग की कि उत्तराखंड के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले सभी प्रोजेक्ट तत्काल रद्द किए जाएं। पॉवर माफिया पूरे देश को बर्बाद कर रहा है। इसके साथ ही उमा भारती ने उत्तराखंड का दौरा करने का एलान भी किया।

साध्वी बोलीं- रद्द की जाएं सभी परियोजनाएं
उमा भारती ने कहा- देश में 3 बड़े माफिया शराब, खनन और पॉवर जनरेशन माफिया मिलकर देश को लूट रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड की सभी परियोजनाओं को तत्काल बंद करने की मांग उठाते हुए कहा कि हिमालय के पहाड़ लाखों साल पुराने कच्चे पहाड़ हैं। जोशीमठ के नीचे सुरंग बना दी गई है। मैं जब मंत्री थी तब कहा था कि उत्तराखंड में गंगा और उसकी सहायक नदियों पर पावर प्रोजेक्ट ना लगाए जाएं। यदि लगानी है तो छोटी परियोजनाएं लगाई जाएं।

कैसे ली जाती है मंजूरी
उमा भारती ने कहा कि इस तरह की परियोजनाओं की स्वीकृति पर्यावरणविदों को मैनेज करके ली जाती है। जोशीमठ की घटना इन्हीं साठगांठ का नतीजा है। मैं खुद जोशीमठ जा रही हूं। वह आदि शंकराचार्य जी की तपस्थली है। हम जोशीमठ को नष्ट नहीं होने देंगे।

सुरक्षित ठिकानों पर ले जाए जा रहे लोग
इस बीच जोशीमठ में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाए जाने का काम जारी है। अधिकारियों ने बताया कि शहर में दरार से प्रभावित घरों की संख्या बढ़कर 603 हो गई है। लगभग 600 प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर भेजे जाने के निर्देश जारी हुए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जमीनी स्थिति का जायजा भी ले चुके हैं। पीएम मोदी ने इस मसले पर सीएम पुष्कर सिंह धामी से बात की और हालात की जानकारी ली।

सुप्रीम कोर्ट से भी गुहार
इस बीच जोशीमठ के संकट को लेकर एक साधु ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से दायर इस याचिका में इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह घटना बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण के कारण हुई है। आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल आर्थिक सहायता और मुआवजा देने का निर्देश दिया जाना चाहिए। पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने वाले विकास की जरूरत नहीं है।

 

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