लखनऊ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का जोर समन्वय बढ़ाने पर है। यह समन्वय सिर्फ सरकार और संगठन तक ही सीमित नहीं रहेगा। विचार परिवार के अन्य संगठनों के साथ भी बेहतर तालमेल के साथ आगे बढ़ने की योजना है। इन्हीं सब बिंदुओं को लेकर शनिवार रात मुख्यमंत्री आवास में भाजपा कोर कमेटी की बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रोय होसबोले भी मौजूद रहे।
आगामी लोकसभा चुनाव की दृष्टि से यूपी भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बीते दो लोकसभा चुनाव में यूपी ने भाजपा का भरपूर साथ दिया है। यही कारण है कि 2024 में भी पार्टी दूसरे राज्यों में होने वाले नफा-नुकसान की भरपाई भी उत्तर प्रदेश से ही करना चाहती है। भाजपा कोर कमेटी की बैठक में चुनावी दृष्टि से समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया। भाजपा के तमाम सांसद-विधायक ऐसे हैं, जिनका संघ के लोगों से संपर्क कम है। इनमें तमाम ऐसे जनप्रतिनिधि भी हैं, जो दूसरे दलों से भाजपा में आए। सभी को संघ से संपर्क बढ़ाना होगा। इसके अलावा विचार परिवार के अन्य संगठनों (संघ के आनुषांगिक संगठन) से तालमेल बिठाकर उन्हें भी चुनाव की दृष्टि से जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
प्रभारी मंत्री जिलों में बनाएं समन्वय संगठन के साथ ही सरकार के स्तर पर भी समन्वय बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई। कहा गया कि जब प्रभारी मंत्री अपने जिलों में जाएं तो वे भाजपा के स्थानीय संगठन से भी नियमित संपर्क रखें। स्थानीय प्रशासन के साथ भी उनका तालमेल बिठाएं। इसके अलावा संघ और विचार परिवार के लोगों से भी प्रभारी मंत्री संपर्क रखें। प्रभारी मंत्रियों को भाजपा सहित सभी संगठनों के बीच संतुलन रखने को सेतु की भूमिका निभानी होगी।
खाली सीटों पर भी चर्चा
इसके अलावा विधायक कोटे वाली दो विधान परिषद सीटें भी रिक्त हो गई हैं। इनमें से एक सीट लक्ष्मण आचार्य के राज्यपाल बनने और दूसरी बनवारी लाल दोहरे के निधन से रिक्त हुई है। साथ ही स्वार सीट भी आजम खां के विधायक पुत्र की सदस्यता खत्म होने के चलते रिक्त हो गई है। वहां भी उपचुनाव होना है। हारी हुई सीटों को जीतने की व्यूह रचना सहित अन्य विभिन्न विषयों पर भी मंथन हुआ। बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक मौजूद रहे।
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