केंद्रीय विश्वविद्यालयों को नहीं मिल रहे योग्य कैंडिडेट, आरक्षित वर्ग के 4 हजार से ज्यादा पद खाली

राज्य

नई दिल्ली

सरकार ने सोमवार को संसद में बताया है कि देशभर के 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और ईडब्लूएस कटिगरी में 4 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। वहीं एक साल में 1400 पद भरे गए हैं। शिक्षा राज्य मंत्री सुभाष सरकार ने संसद में भाजपा नेता धर्मेंद्र कश्यप के सवाल का जवाब देते हुए यह जानकारी दी। शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि टीचिंग पोस्ट पर 549 वैकेंसी थीं जो कि भरी नहीं जा सकीं। विश्वविद्यालयों का कहना है कि उन्हें इन पदों के लिए योग्य अभ्यर्थी नहीं मिल रहे हैं। जिन पांच विश्वविद्यालयों ने योग्यता की कमी को कारण बताया है उनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, और हैदराबाद विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।

संसद में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक बीएचयू में सबसे ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं। यहां कुल 576 वैकेंसी हैं जिनमें से 108 दलितों की , 81 आदिवासियों, 311 ओबीसी, 53 ईडब्लूएस और 44 दिव्यांगों के लिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय और बीएचयू में सबसे ज्यादा आरक्षित वर्ग की वैकेंसी है। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर स्तर के 299 पद खाली हैं। वहीं बीएचयू में यह संख्या 288 है।

इन विश्वविद्यालयों के अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय, विश्व भारती विश्वविद्यालय, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में भी 200-200 वैकेंसी हैं। भाजपा नेता कश्यप के सवाल पर शिक्षा मंत्र ने कहा कि ये सभी संस्थान संसदीय कानूनों के तहत स्थापित स्वायत्त संस्थान हैं और नियुक्तियों की जिम्मेदारी इन संस्थानों स्टैचुटरी बॉडी पर होती है। उन्होंने कहा कि सेंट्र एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन ऐक्ट 2019 आने क बाद आरक्षित वर्ग की जगहों को अनारक्षित नहीं किया जा सकता है। विश्वविद्यलयों को मिशन मोड से इन रिक्तियों को भरने का निर्देश दिया गया है।

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