नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच दिल्ली में लोकसभा चुनाव को लेकर समझौता होगा या नहीं? यह सवाल अब भी कायम है और जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि कांग्रेस को 'आप' की ओर से आया ऑफर मंजूर होगा या नहीं। 'आप' ने साफ कर दिया है कि यदि कांग्रेस को साथ मिलकर लड़ना है तो एक ही सीट से संतोष करना पड़ेगा। 7 लोकसभा सीटों में से 'आप' ने देश की सबसे पुरानी पार्टी को एक ही सीट क्यों दी, इस पर दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी ने एक बार फिर अपना रुख साफ किया है। 'आप' का कहना है कि दिल्ली में कांग्रेस के वोट लगातार घट रहे हैं।
दिल्ली के विधायक और आप के वरिष्ठ नेता संजीव झा ने कहा कि कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है और दिल्ली में आप का जनाधार ज्यादा है इसलिए यह फॉर्मूला दिया गया। संजीव झा ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'यदि वोटिंग पर्सेंटेज की बात करें, 2015 का चुनाव हो या 2020 का, लगातार कांग्रेस का वोट घट रहा है। इस लिहाज से तय कि कांग्रेस एक सीट पर और आम आदमी पार्टी 6 सीट पर लड़े। मुझे लगता है कि महत्वपूर्ण जीतना है कि कौन कहां से लड़कर जीत सकता है, कौन कितनी सीटों पर लड़ता है यह महत्वपूर्ण नहीं है। इसी को ध्यान में रखकर कि आम आदमी पार्टी का जनाधार ज्यादा है। आप के विधायक हैं, पार्षद हैं, आप के वोटर्स हैं, चाहें विधानसभा के वोट हों या एमसीडी के चुनाव। जब चुनाव लड़ते हैं तो कई चीजों को देखना पड़ता है। चूंकि आम आदमी पार्टी का दिल्ली में जनाधार ज्यादा है इसलिए तय किया गया कि आप ज्यादा सीटों पर लड़े।'
इससे पहले राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने कांग्रेस के सामने ऑफर रखते हुए कहा था कि आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस की दावेदारी एक भी सीट पर नहीं बनती है, लेकिन गठबंधन धर्म और साथी दल का मान रखने के लिए उसे एक सीट देने का फैसला किया गया है। उन्होंने यह भी कह दिया था कि यदि कांग्रेस की ओर से इसे स्वीकार नहीं किया जाता है तो जल्द ही 'आप' की ओर से छह उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया जाएगा। कांग्रेस पार्टी की ओर से इस पर कोई जवाब पेश नहीं किया गया है।
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