कोर्ट ने जताई चिंता: ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं डिलीवरी कर्मचारी, पुलिस नहीं करती वैरिफिकेशन

मध्य प्रदेश राज्य

इंदौर
 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई बिंदुओं पर बात की। ऑनलाइन खाने-पीने का सामान सप्लाय करने वालों को लेकर कहा कि सबसे ज्यादा रेड सिग्नल जंप डिलीवरी वाले ही करते हैं। दो मिनट बचाने रेड लाइट जंप करते हैं और कुछ नहीं होता। ये हमारे घरों तक पहुंच रखते हैं, लेकिन इनके पुलिस सत्यापन की व्यवस्था नहीं है। कभी इनका आपराधिक रिकॉर्ड नहीं जांचा। इस बारे में नीति बनानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन बेल्ट, उद्यान और फुटपाथ पर धड़ल्ले से धार्मिक स्थल बन रहे हैं, लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है।

ये धार्मिक स्थल यातायात को बाधित कर रहे हैं। यह किसी एक क्षेत्र की नहीं बल्कि पूरे शहर की समस्या है। इसका स्थायी समाधान जरूरी है। करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर धार्मिक गतिविधियों के नाम पर कब्जा हो रहा है। हालत यह हो जाती है कि 80 फीट चौड़ी सड़क पर भी चलना मुश्किल है।

ई-रिक्शा को लेकर कोई योजना नहीं

कोर्ट ने ई-रिक्शा की व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई। कहा कि इस बारे में सख्ती से कार्रवाई जरूरी है। पुलिस ई-रिक्शा चालकों के पुलिस सत्यापन, ट्रेनिंग इत्यादि की व्यवस्था करे। ई-रिक्शा के चालकों की कोई सूची नहीं है। कभी उनका आपराधिक रिकार्ड नहीं जांचा जाता। इस संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित करना चाहिए।

यह कहा याचिकाकर्ता ने

याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष कहा कि

    चौराहों पर लगे सिग्नल 24 घंटे चालू रखे जाएं।

    पुलिसकर्मी चौराहों पर यातायात नियंत्रित करने के बजाय मोबाइल चलाते हैं। सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    वीआईपी मूवमेंट के दौरान सिग्नल ग्रीन रखे जाएं।

    सड़कों पर गड्ढों की समस्या का स्थायी समाधान हो।

कोर्ट ने कहा कि

    जो रेड लाइट जंप करते हैं, उन्हें वहीं दो घंटे रोकें।

    जिस चौराहे पर चालान बन रहे हैं, वहां तैनात पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

    बीमा रिन्यू करने वाली कंपनी पहले बकाया चालान जमा कराए। इसके बाद बीमा रिन्यू किया जाए।

    कार पुलिंग को बढ़ावा दें। शुरुआत हाई कोर्ट से हो सकती है। एक ऑफिस से जुड़े वकील एक कार से कोर्ट आएं तो सड़क पर वाहन संख्या कम करने में मदद होगी।

    आईटीएमएस साफ्टवेयर के माध्यम से निगरानी और कानूनी कार्रवाई के लिए सैकड़ों स्थानों पर हाईडेफिनिशन कैमरे लगाए गए हैं।
    पिछले दो वर्ष में यातायात पुलिस द्वारा 12 लाख से अधिक ई-चालान किए गए हैं।

    यातायात नियमन के तीनों घटकों – यातायात इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

    सरकार ने राहवीर योजना शुरू की है। इसके तहत दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने वाले व्यक्ति को उचित पुरस्कार दिया जाता है।

    किसी भी समय समस्या पर प्रतिक्रिया देने और उसका समाधान करने के लिए 40 से अधिक त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) बनाए गए हैं।

 

 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry