MP में छुट्टी व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 2026 से लागू होंगे नए अवकाश नियम; लाखों कर्मचारी होंगे लाभान्वित

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल
 प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हित में जल्द ही तीन बड़े कदम उठाने जा रही है। साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षकों को वर्ष में दस दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा। वहीं, सेवानिवृत्ति के बाद शत-प्रतिशत अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी मिलेगी। सरकारी नौकरी के लिए दो बच्चों की शर्त भी हटाई जा रही है। जनवरी 2026 से यह प्रविधान लागू हो जाएंगे।

सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को अभी अर्जित अवकाश की सुविधा नहीं मिलती है। ग्रीष्मावकाश मिलने के कारण यह प्रविधान रखा गया था। धीरे-धीरे ग्रीष्मावकाश कम होते गए और अब ये दो माह से घटकर 20-22 दिन ही रह गए हैं। शिक्षक लंबे समय से अर्जित अवकाश का लाभ देने की मांग कर रहे थे।

मध्य प्रदेश के 7 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। वित्त विभाग ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम 2025 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. महिला कर्मचारियों की संतान पालन अवकाश व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन किया गया है। अब तक महिला कर्मचारियों को 2 वर्ष (730 दिन) की संतान पालन अवकाश पूर्ण वेतन के साथ दिया जाता था, लेकिन नए नियमों में पहले 365 दिन 100% वेतन और उसके बाद अगले 365 दिन केवल 80% वेतन देने का प्रावधान किया गया है।

महिला कर्मचारी यह अवकाश एक बार में लें या अलग-अलग हिस्सों में, 365 दिनों के बाद 80% वेतन ही मिलेगा। नियमों में सरोगेसी से जन्मे बच्चे की देखभाल करने वाली महिला कर्मचारी को भी चाइल्ड केयर लीव का लाभ मिलेगा।

दत्तक संतान पर भी मिलेगी छुट्टी

नए अवकाश नियमों में दत्तक संतान ग्रहण अवकाश भी शामिल किया गया है। दत्तक लिए गए बच्चे की एक साल की उम्र तक कर्मचारी अवकाश ले सकेंगे।

कर्मचारियों को हर वर्ष मिलेगा 30 दिन अर्जित अवकाश

नए नियमों में कर्मचारियों को हर वर्ष 30 दिन का अर्जित अवकाश देने का प्रावधान किया गया है। ये दो किस्तों में (6 माह पर 15-15 दिन) होगा। किसी भी कर्मचारी को एक साथ 5 साल से अधिक का लगातार अवकाश मंजूर नहीं होगा। वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि अवकाश मांगना कर्मचारी का “अधिकार” नहीं माना जाएगा। यानी अब अंतिम निर्णय स्वीकृत देने वाले अधिकारी का होगा।

24 साल बाद हटाई जा रही पाबंदी

उधर, सरकार एक और बड़ा निर्णय यह करने जा रही है कि यदि नौकरी कर रहे किसी अधिकारी-कर्मचारी का तीसरा बच्चा होता है तो उसे अपात्र मानकर सेवा से हटाया नहीं जाएगा। 26 जनवरी 2001 में तीसरा बच्चा होने पर अपात्र मान लेने की शर्त लागू की गई थी। दरअसल, छत्तीसगढ़, राजस्थान सहित अन्य राज्य इस तरह की शर्त को हटा चुके हैं।

इस निर्णय से स्कूल, उच्च, चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों को लाभ होगा। हालांकि जिन पर कार्रवाई हो चुकी है, उन प्रकरणों में कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि निर्णय को भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है, जिस पर जल्द अंतिम निर्णय होने की संभावना है।

चिकित्सा अवकाश के नियम भी सख्त

नए नियम के अनुसार मेडिकल सर्टिफिकेट अवकाश की गारंटी नहीं रहेगी। निर्णय स्वीकृति प्राधिकारी के आदेश पर निर्भर करेगा। ऐसा मामला जिसमें कर्मचारी के दोबारा कार्य ग्रहण करने की संभावना न हो अवकाश आवेदन अमान्य नहीं माना जाएगा।

पूरे सेवाकाल में 180 दिन का अर्द्धवेतन अवकाश बिना मेडिकल सर्टिफिकेट भी मिल सकेगा, लेकिन यदि कर्मचारी इस दौरान इस्तीफा देता है, तो यह अवकाश अर्द्धवेतन अवकाश के समान माना जाएगा और अंतर की राशि वसूल की जाएगी।

स्टडी लीव का भी प्रावधान

कर्मचारियों को अध्ययन के लिए भी अवकाश की सुविधा मिलेगी। सामान्यतः 1 वर्ष तक की स्टडी लीव दी जाएगी। पूरे सेवाकाल में अधिकतम 24 महीने की छुट्‌टी मिलेगी पर फीस तथा अन्य खर्च कर्मचारी को स्वयं वहन करने होंगे। यात्रा भत्ता नहीं मिलेगा। लीव से पहले बॉन्ड भरना अनिवार्य होगा, ताकि अध्ययन के बाद कर्मचारी नौकरी पर लौटे।

35 दिन बाद लागू होंगे नए नियम

नियम 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने जा रहे हैं, जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियों की व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी।

 

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