चंडीगढ़.
हरियाणा में अब पुलिस अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों की जांच में लेटलतीफी नहीं चलेगी। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण और जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण के लिए किसी भी शिकायत के छह महीने के अंदर कार्रवाई पूरी करना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए नियमों में बदलाव किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से विधानसभा में हरियाणा पुलिस (संशोधन) अधिनियम 2026 पारित कराया जाएगा। पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और आमजन की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे पुलिस में जवाबदेही बढ़ेगी और प्रशासनिक मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।
हालांकि, गुमनाम या फर्जी नाम से भेजी गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण को डीएसपी या इससे बड़े रैंक के पुलिस अधिकारी के खिलाफ मानवाधिकार आयोग की संस्तुति, पीड़ित के शपथपत्र, पुलिस हिरासत में मृत्यु, दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास, गैर कानूनी रूप से हिरासत में रखने, प्रताड़ित करके संपत्ति जुटाने या संगठित अपराध के मामलों में जांच का अधिकार दिया गया है।
राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण शिकायत की सत्यता के बारे में प्रथम दृष्टया संतुष्ट होने पर ही जांच करेगा। अदालतों, मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग या लोकायुक्त के समक्ष चल रहे मामलों या पहले से निपटाए जा चुके मामलों के साथ ही पांच साल पुराने मामलों की जांच का अधिकार नहीं होगा। धरने-प्रदर्शन या रोड जाम के मामलों में पुलिस लाठीचार्ज की जांच भी अधिकार क्षेत्र से बाहर रहेगी। इसी तरह जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण को इंस्पेक्टर रैंक तक के पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की जांच का अधिकार दिया गया है।
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