ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी, ब्लड मनी की मांग; इरादे हुए स्पष्ट

दुनिया

तेहरान 

पाकिस्तान में बातचीत से पहले ईरान ने अपने इरादे बता दिए हैं। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का कहना है कि आक्रमण करने वालों को बगैर सजा दिए छोड़ा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान शहीदों के लिए ब्लड मनी की भी मांग करेगा। इसके अलावा भी उन्होंने कई मांगें रखी हैं। उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच दो सप्ताह का सीजफायर हुआ है और पाकिस्तान में आगे की वार्ता होनी है।

खामेनेई ने इस युद्ध में ईरान की जीत का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, 'आज तक के हालातों को देखते हुए यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि आप ईरान की बहादुर जनता, इस मैदान में असली विजेता रहे हैं।'

रखी हैं ये मांगें
खामेनेई ने कहा, 'हम अपराधी हमलावरों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ेंगे। हम हर चोट का हर्जाना, शहीदों के लिए ब्लड मनी और इस जंग में अपाहिज हुए सैनिकों के लिए मुआवाजा जरूर लेंगे। साथ ही, हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन को यकीनन एक नए स्तर पर ले जाएंगे।' उन्होंने साफ किया है कि अस्थायी सीजफायर का मतलब युद्ध खत्म होना नहीं है।

ईरान ने रख दी लेबनान वाली शर्त
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू करने के लिए लेबनान में इजरायली हमलों का तुरंत रुकना एक अहम शर्त है। उन्होंने कहा कि ईरान की 10-सूत्रीय योजना के तहत प्रस्तावित युद्धविराम 'ईरानी नेतृत्व और जनता के बलिदान का परिणाम' है। उन्होंने कहा कि अब देश कूटनीति, रक्षा तथा जनभागीदारी के स्तर पर एकजुट रहेगा।

ट्रंप जता चुके हैं आशंका
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते के प्रभावी होने को लेकर आशंका जताई है। उन्होंने गुरुवार को कहा, 'ईरान बहुत खराब काम कर रहा है। ईरान तेल को होर्मुज से गुजरने देने के संदर्भ में बहुत खराब काम कर रहा है। कुछ लोग इसे शर्मनाक कहेंगे।' उन्होंने कहा, 'हमारे बीच ऐसा कोई समझौता नहीं है।'

पाकिस्तान की वार्ता पर नजर
अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को वार्ता की मेजबानी करने जा रहे पाकिस्तान ने राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। हालांकि, शीर्ष ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर किए गए इजराइली हमले वार्ता को निरर्थक बना सकते हैं। अमेरिका और ईरान बुधवार को दो हफ्ते के लिए सशर्त युद्ध-विराम पर सहमत हो गए। इसके बाद, मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्ध-विराम को एक स्थायी शांति में तब्दील करने के लिए इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बैठक होनी है।

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