कलकत्ता
पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की लेकर कवायद तेज हो चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बतौर केंद्रीय पर्यवेक्षक भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल की बैठक के लिए कोलकाता पहुंच चुके हैं। यहां वह भाजपा के तमाम 206 विधायकों को संबोधित भी कर सकते हैं। इस बीच सूत्रों के हवाले से जो खबर सामने आ रही है वह यह है कि शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं, उनके साथ दो उपमुख्यमंत्रियों को भी पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। आज शाम तक इसका ऐलान हो सकता है।
भाजपा ने हालांकि मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पसंद की आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दो जीत हासिल करने के बाद इस दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। उन्होंने नंदीग्राम सीट बरकरार रखी, जहां उन्होंने 2021 में बनर्जी को हराया था और अब उन्होंने वह भवानीपुर सीट भी तृणमूल सुप्रीमो के हाथ से छीन ली है, जिसे लंबे समय से उनका गढ़ माना जाता था।
शुभेंदु अधिकारी कभी बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में शामिल थे और ग्रामीण पश्चिम बंगाल में तृणमूल के संगठनात्मक विस्तार के प्रमुख सूत्रधार माने जाते थे। वह दिसंबर 2020 में भाजपा में शामिल हुए और राज्य में पार्टी के सबसे आक्रामक प्रचारकों में से एक बन गए।
इन्हें मिल सकता है मौका
शुभेंदु अधिकारी के अलावा पश्चिम बंगाल सरकार में बतौर मंत्री दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, रूपा गांगुली, स्वपन दासगुप्ता, शंकर घोष, तापस रॉय, अशोक डिंडा और डॉ. राजेश कुमार को भी मौका मिल सकता है।
कोलकाता पहुंचे अमित शाह
अमित शाह का आज शुभेंदु अधिकारी समेत अन्य भाजपा नेताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाह का स्वागत किया। हवाई अड्डे से वह न्यू टाउन स्थित एक होटल गए। दोपहर में अमित शाह विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे। शनिवार को वह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे।
हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन का अंत कर दिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा झटका दिया। राज्यपाल आर एन रवि ने बृहस्पतिवार को विधानसभा भंग कर दी, जिससे नयी सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।
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