कॉर्पोरेट जगत में हलचल: PM मोदी की अपील के बाद कंपनियां बना रहीं WFH रणनीति

देश

नई दिल्ली

ईरान में बीते करीब ढाई महीनों से चल रही भीषण जंग की आंच अब भारत तक आने लगी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए वर्क फ्रॉम होम के मॉडल को फिर से कोरोना के दिनों की तरह लागू करने की अपील की थी। उन्होंने सोने की खरीद भी कम करने समेत कुल 7 अपील की थी, जिनमें सबसे अहम वर्क फ्रॉम होम ही है। इस बीच रिलायंस और टाटा समूह जैसे देश के बड़े कॉरपोरेट संस्थान फिर से वर्क फ्रॉम होम की नीति लागू करने पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल मंथन चल रहा है कि इस नीति को कैसे लागू किया जाए कि कामकाज प्रभावित न हो और पेट्रोल और डीजल की बचत भी संभव हो।

मुकेश अंबानी के मालिकाना हक वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी सहयोगी संस्थाओं में फिलहाल हाइब्रिड मॉडल लागू है। इस बीच कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि हम पीएम मोदी की अपील के आधार पर फिर से आकलन कर रहे हैं कि कैसे इस फैसले को और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है। अब तक टाटा ने इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन समूह की सभी कंपनियों में इसे लेकर विचार चल रहा है। वहीं आईटी सेक्टर की कई कंपनियों में तो फिलहाल वर्क फ्रॉम होम की नीति लागू है।

हालात सुधरने के बाद ज्यादातर कंपनियों ने हाइब्रिड मॉडल लागू किया है। इसके तहत सीनियर लोगों को ऑफिस बुलाया जा रहा है और जूनियर स्टाफ घर से ही काम कर रहे हैं। यही नहीं बड़ी संख्या में जिन्हें जाना भी पड़ रहे हैं, उन्हें भी वैकल्पिक तौर पर घरों से ही काम करने का मौका मिल रहा है। जानकारों का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी की अपील कोर आईटी कंपनियों के लिए तो ठीक है, लेकिन इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स में लगी कंपनियां इसे कैसे लागू करेंगी। यह सोचने वाली बात है। जैसे एल एंड टी के ज्यादातर कर्मचारी तो ऑनसाइट काम करते हैं। फिर भी इन कंपनियों की ओर से कर्मचारियों से कहा जा रहा है कि वे जहां तक संभव हो, यात्रा में कटौती करें।

10 मई 2026 को सिकंदराबाद में पीएम मोदी ने नागरिकों से 'देशभक्तिपूर्ण व्यवहार' में बदलाव लाने की अपील की. उन्होंने कहा कि हमें पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करना चाहिए, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कारपूलिंग को बढ़ावा देना चाहिए और जितना हो सके वर्क फ्रॉम होम (WFH) या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर वापस लौटना चाहिए. इतना ही नहीं, उन्होंने एक साल तक सोना (Gold) न खरीदने और शादियां भारत के अंदर ही करने की सलाह दी है. उनका कहना है कि जो विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) हम तेल खरीदने में खर्च करते हैं, उसे बचाना हर भारतीय की जिम्मेदारी है। इस पूरे संकट की जड़ एक युद्ध है. फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' का रास्ता बंद हो गया है, जहां से भारत का 54% कच्चा तेल आता है. नतीजा यह हुआ कि जो कच्चा तेल 2025 में 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह मई 2026 तक 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए दुनिया के किसी भी कोने में हुई अशांति सीधे हमारी रसोई और गाड़ी की टंकी पर असर डालती है।

कुछ कंपनियों को तुरंत ही पलटने होंगे फैसले
बता दें कि कोरोना काल में बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम की पॉलिसी कॉरपोरेट सेक्टर में लागू हुई थी। अब यदि फिर से यह लागू हुई तो कई कंपनियों को अपने फैसले पलटने होंगे। बीते कुछ सालों में हालात बदले थे तो कंपनियां वर्क फ्रॉम ऑफिस को फिर से प्रोत्साहित कर रही थीं। अब उन्हें दोबारा कोरोना काल वाली पॉलिसी पर लौटना होगा।

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