लखनऊ
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि कृषि प्रधान देश भारत का किसान हमेशा से नवाचारी रहा है और खेती किसानी में नए प्रयोग कर कृषि योग्य भूमि की उत्पादक क्षमता बढ़ाने और उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर करने में दिलचस्पी जाहिर करता रहा है। यही कारण है कि भारत में कृषि क्षेत्र कभी घाटे का सौदा नहीं रहा है।
योगी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन शनिवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहा, पहले किसान केवल किसान नहीं था, बल्कि वह इनोवेटर था। कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं था। उस समय का किसान स्वयं नवाचार करता था। हमारा व्यापारी केवल व्यापारी नहीं था, बल्कि वह देश को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी था। हमारी अर्थव्यवस्था खेती-बाड़ी से जुड़ी हुई थी, जो अपने उत्पादों को दुनिया भर में पहुंचाने का काम करती थी। भारत एक कृषि प्रधान देश माना जाता है। हमारी सबसे बड़ी ताकत एमएसएमई और कृषि क्षेत्र था।
विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण
सीएम योगी विज्ञान का मतलब ही लोक कल्याण है। दुनिया के अंदर जिस भी देश ने प्रगति की है, उसके पास विज्ञान का यही भाव था। आधुनिक विज्ञान का कुल समय चार से पांच सौ साल का रहा है। भारत की प्राचीन गौरवशाली परंपरा का अध्ययन करें तो पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी। चार सौ साल पहले भी लगभग 24-25 प्रतिशत हिस्सेदारी हमारी थी, लेकिन स्वतंत्रता के समय हम डेढ़ से दो प्रतिशत पर आ गए थे। हमें यह देखना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। मुख्यमंत्री ने जगदीश चंद्र बसु की दो पौधों वाली कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवों में ही नहीं, जड़-पौधों में भी चेतना होती है। उन्होंने बचपन में अपनी मां द्वारा पौधे लगाए जाने का जिक्र किया और कहा कि ज्ञान जहां से भी आए, उसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कारीगरों को बदहाल बना दिया गया था, उनके बनाए उत्पादों को बेकार बताया गया था, परिणामस्वरूप वे बाजारों से बाहर हो गए थे।
2017 के बाद एक जिला एक उत्पाद दिया जोर
सीएम योगी ने कहा, 2017 के बाद हमने 'एक जिला एक उत्पाद' शुरू करके डिजाइन और पैकेजिंग पर जोर दिया। बाजार से कारीगरों को जोड़ने का काम किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में विशेषकर बुजुर्गों की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिये लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 200 बिस्तरों वाले सात मंजिला अत्याधुनिक 'नेशनल सेंटर फॉर एजिंग' का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद कार्यदायी संस्था के अभियंताओं को युद्धस्तर पर कार्य कर प्राथमिकता के आधार पर समय से पहले निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए।
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