लेबनान सीजफायर के बीच कूटनीतिक हलचल तेज, ईरान डील पर 60 दिनों की खिड़की अहम

दुनिया

नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते का भविष्य अब स्विट्जरलैंड में होने वाली अहम बैठक पर निर्भर करता दिख रहा है. अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची स्विट्जरलैंड पहुंच रहे हैं, जहां दोनों पक्ष स्थायी समझौते को लेकर तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू कर सकते हैं.

यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष विराम लागू हुआ है. इस सीजफायर ने उन कोशिशों को नई उम्मीद दी है, जिनका मकसद ईरान युद्ध को खत्म कर क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है.

इस सप्ताह अमेरिका और ईरान ने 14 सूत्रीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सहमति बनाई थी. इसके तहत 60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े विवादित मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी.

अमेरिका-ईरान के बीच कई मुद्दों अनसुलझे
कई अहम सवालों के जवाब अब भी स्पष्ट नहीं है. सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के परमाणु कार्यक्रम का है. दोनों देशों के बीच इस बात पर अंतिम सहमति नहीं बनी है कि संवर्धित यूरेनियम का क्या होगा और भविष्य में परमाणु गतिविधियों की निगरानी किस तरह की जाएगी.

वार्ता से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपना स्विट्जरलैंड दौरा रद्द कर दिया है. व्हाइट हाउस ने इसके पीछे लेबनान में बढ़ते तनाव को वजह बताया था. लेकिन अब संघर्ष विराम लागू होने के बाद वार्ता दोबारा पटरी पर आती दिख रही है. स्टीव विटकॉफ ईरानी विदेशी मंत्री के साथ बैठक करेंगे.

लेबनान का मुद्दा भी इस समझौते के लिए बेहद अहम है. अंतरिम समझौते में सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई समाप्त करने की बात कही गई है, जिसमें लेबनान भी शामिल है. लेकिन इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते का हिस्सा नहीं है और दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा.

ईरान का कहना है कि समझौते के किसी भी उल्लंघन की जिम्मेदारी अमेरिका की होगी. वहीं अमेरिका और कतर के मध्यस्थों ने लेबनान संघर्ष विराम कराने में अहम भूमिका निभाई है.

MoU में ईरान को क्या-क्या मिल रहा है?
आर्थिक मोर्चे पर भी यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान को प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज अरबों डॉलर के फंड तक पहुंच और तेल निर्यात की इजाजत मिल सकती है. इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की भी चर्चा है.

इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात सुधरने लगे हैं. युद्ध के दौरान ईरान द्वारा लगाई गई रुकावटों की वजह से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ था. अब तेल आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और ईरान ने अंतरिम वार्ताओं दौरान प्रस्तावित शुल्क भी माफ करने का संकेत दिया है.

ईरान डील को लेकर ट्रंप का विरोध!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस समझौते का बचाव कर रहे हैं. आलोचकों का आरोप है कि युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका ने ईरान को जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं. हालांकि ट्रंप का दावा है कि ईरान कमजोर स्थिति में है और अमेरिका ने कोई बड़ी रियायत नहीं दी.

ऐसे में स्विट्जरलैंड की बैठक सिर्फ एक औपचारिक वार्ता नहीं, बल्कि यह तय करेगी कि 60 दिन का यह अंतरिम समझौता स्थायी शांति में बदल पाएगा या फिर अमेरिका और ईरान एक बार फिर टकराव की राह पर लौट जाएंगे.

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