घर-घर ट्यूशन से बड़े कोचिंग संस्थानों तक, बिहार में हजारों करोड़ का शिक्षा कारोबार

राज्य

पटना 
बिहार में लगभग 1100 करोड़ रुपये का कोचिंग कारोबार है। ट्यूशन और छोटे स्तर पर कोचिंग चलाकर रोजी-रोजगार करने के मामले में बिहार देश में तीसरे पायदान पर है। घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाना हो या एक जगह कुछ बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाने का मामला हो, बिहार में इस तरह का काम करने वालों की संख्या साढ़े पांच लाख से अधिक है। दिलचस्प यह है कि असंगठित क्षेत्र में बच्चों को पढ़ाकर जीविकोपार्जन करने वालों में 49 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। दरअसल, सरकार ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए निबंधन की सुविधा दे रखी है। 24 अगस्त 2021 से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले सभी सेक्टर के कामगारों का पंजीकरण ई-श्रम पोर्टल पर हो रहा है।

देश में अब तक 54 लाख तीन हजार से अधिक लोगों ने कोचिंग कारोबार से जुड़े होने के तौर पर अपना पंजीकरण कराया है। इसमें सबसे अधिक उत्तरप्रदेश में 18 लाख 31 हजार तो दूसरे पायदान पर पश्चिम बंगाल है जहां छह लाख 71 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। तीसरे पायदान पर रहे बिहार में पांच लाख 55 हजार ने इस क्षेत्र में पंजीकरण कराया है। वहीं चौथे पायदान पर मध्यप्रदेश में दो लाख 41 हजार तो केरल में एक लाख 97 हजार ने पंजीकरण कराया है। देश में कुल पंजीकृत लोगों में 63 फीसदी महिलाएं तो 37 फीसदी पुरुष हैं।

हर माह औसतन 1100 करोड़ का है कारोबार
होम ट्यूटर के रूप में ग्रामीण इलाके में प्रति बच्चे ढाई-तीन हजार तो शहरी इलाके में चार से छह हजार रुपए शिक्षकों को मिल जाते हैं। अगर औसतन पांच हजार प्रति बच्चे के हिसाब से शिक्षक फी ले रहे हैं और एक शिक्षक औसतन चार बच्चे को पढ़ा रहे हैं तो उनको हर महीने 20 हजार की आय हो जाती है। इस तरह पांच लाख 55 हजार शिक्षकों के हिसाब से देखें तो छोटे स्तर पर कोचिंग चलाने वालों या होम ट्यूशन के कारोबार में हर महीने 1100 करोड़ से अधिक की आमदनी हो रही है। वैसे यह आमदनी देश-प्रदेश के नामी-गिरामी संस्थानों को छोड़कर है जो संस्थागत तौर पर चल रहे हैं।

बिहार में इन असंगठित क्षेत्र के होम ट्यूटर या छोटे स्तर के कोचिंग संस्थानों के अलावा बड़े कोचिंग संस्थानों का एक बड़ा नेटवर्क अलग से खड़ा है। नीट, जेईई, यूपीएससी, बीपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले इन बड़े संस्थानों की आय असीमित है। इन संस्थानों की वार्षिक आमदनी हजारों करोड़ में होती है। इनके शिक्षकों को भी आकर्षक तौर पर लाखों में वेतन मिला करता है।

18 से 40 वर्ष के 90 फीसदी पढ़ाकर कमा रहे
बिहार में कोचिंग के इस कारोबार में 18 से 40 वर्ष के बीच 90.77 फीसदी लोग हैं। वहीं 40 से 50 वर्ष के बीच 5.30 फीसदी तो 50 से ऊपर के लोगों की संख्या मात्र 3.68 फीसदी है। निबंधित लोगों में 49 फीसदी महिलाएं तो 51 फीसदी पुरुष हैं। पंजीकृत लोगों में सबसे अधिक पटना में 49 हजार 853 लोग कोचिंग कारोबार से जुड़े हुए हैं। जबकि दरभंगा में 24 हजार 682, मधुबनी में 25 हजार 408, मुजफ्फरपुर में 29 हजार 806, समस्तीपुर में 23 हजार 494, सारण में 21 हजार 750, भागलपुर में 19 हजार 608, गयाजी में 23 हजार 853 लोग पढ़ाने का काम कर रहे हैं।पटना 
बिहार में लगभग 1100 करोड़ रुपये का कोचिंग कारोबार है। ट्यूशन और छोटे स्तर पर कोचिंग चलाकर रोजी-रोजगार करने के मामले में बिहार देश में तीसरे पायदान पर है। घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाना हो या एक जगह कुछ बच्चों को एकत्रित कर पढ़ाने का मामला हो, बिहार में इस तरह का काम करने वालों की संख्या साढ़े पांच लाख से अधिक है। दिलचस्प यह है कि असंगठित क्षेत्र में बच्चों को पढ़ाकर जीविकोपार्जन करने वालों में 49 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। दरअसल, सरकार ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए निबंधन की सुविधा दे रखी है। 24 अगस्त 2021 से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले सभी सेक्टर के कामगारों का पंजीकरण ई-श्रम पोर्टल पर हो रहा है।

देश में अब तक 54 लाख तीन हजार से अधिक लोगों ने कोचिंग कारोबार से जुड़े होने के तौर पर अपना पंजीकरण कराया है। इसमें सबसे अधिक उत्तरप्रदेश में 18 लाख 31 हजार तो दूसरे पायदान पर पश्चिम बंगाल है जहां छह लाख 71 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है। तीसरे पायदान पर रहे बिहार में पांच लाख 55 हजार ने इस क्षेत्र में पंजीकरण कराया है। वहीं चौथे पायदान पर मध्यप्रदेश में दो लाख 41 हजार तो केरल में एक लाख 97 हजार ने पंजीकरण कराया है। देश में कुल पंजीकृत लोगों में 63 फीसदी महिलाएं तो 37 फीसदी पुरुष हैं।

हर माह औसतन 1100 करोड़ का है कारोबार
होम ट्यूटर के रूप में ग्रामीण इलाके में प्रति बच्चे ढाई-तीन हजार तो शहरी इलाके में चार से छह हजार रुपए शिक्षकों को मिल जाते हैं। अगर औसतन पांच हजार प्रति बच्चे के हिसाब से शिक्षक फी ले रहे हैं और एक शिक्षक औसतन चार बच्चे को पढ़ा रहे हैं तो उनको हर महीने 20 हजार की आय हो जाती है। इस तरह पांच लाख 55 हजार शिक्षकों के हिसाब से देखें तो छोटे स्तर पर कोचिंग चलाने वालों या होम ट्यूशन के कारोबार में हर महीने 1100 करोड़ से अधिक की आमदनी हो रही है। वैसे यह आमदनी देश-प्रदेश के नामी-गिरामी संस्थानों को छोड़कर है जो संस्थागत तौर पर चल रहे हैं।

बिहार में इन असंगठित क्षेत्र के होम ट्यूटर या छोटे स्तर के कोचिंग संस्थानों के अलावा बड़े कोचिंग संस्थानों का एक बड़ा नेटवर्क अलग से खड़ा है। नीट, जेईई, यूपीएससी, बीपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले इन बड़े संस्थानों की आय असीमित है। इन संस्थानों की वार्षिक आमदनी हजारों करोड़ में होती है। इनके शिक्षकों को भी आकर्षक तौर पर लाखों में वेतन मिला करता है।

18 से 40 वर्ष के 90 फीसदी पढ़ाकर कमा रहे
बिहार में कोचिंग के इस कारोबार में 18 से 40 वर्ष के बीच 90.77 फीसदी लोग हैं। वहीं 40 से 50 वर्ष के बीच 5.30 फीसदी तो 50 से ऊपर के लोगों की संख्या मात्र 3.68 फीसदी है। निबंधित लोगों में 49 फीसदी महिलाएं तो 51 फीसदी पुरुष हैं। पंजीकृत लोगों में सबसे अधिक पटना में 49 हजार 853 लोग कोचिंग कारोबार से जुड़े हुए हैं। जबकि दरभंगा में 24 हजार 682, मधुबनी में 25 हजार 408, मुजफ्फरपुर में 29 हजार 806, समस्तीपुर में 23 हजार 494, सारण में 21 हजार 750, भागलपुर में 19 हजार 608, गयाजी में 23 हजार 853 लोग पढ़ाने का काम कर रहे हैं।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry