अविश्वास प्रस्ताव की चेतावनी: विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर लगाए गंभीर आरोप

देश

नई दिल्ली
विपक्ष के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया है। उनका आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया है। इस पर कांग्रेस नेताओं ने जमकर प्रतिक्रिया दी है और इसे संसद की परंपरा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है।

स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है। सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे। सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की। इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है।" कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, "लोकसभा अध्यक्ष एक संवैधानिक पद है, यह सत्ताधारी पार्टी का नहीं है। जिस तरह से विपक्ष के नेता की आवाज को भेदभाव के साथ दबाया जा रहा है, वह बहुत चिंताजनक है। यह संसद है, सेंसर बोर्ड नहीं।" उनका इशारा लोकसभा में विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने की ओर था, जो उनके अनुसार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा का नहीं, बल्कि सदन की परंपरा और उसकी गरिमा का है। उन्होंने यह सवाल उठाया, "क्या कभी आपने सुना है कि संसद में प्रधानमंत्री महिला सांसदों से डरते हैं? यह शर्मनाक नहीं है?" उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए और इसी कारण विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने पर मजबूर है। कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की और कहा, "स्पीकर को सभी पार्टियों को साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन ओम बिरला ने भाजपा की पार्टी लाइन अपनाई है, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।" उनका मानना है कि स्पीकर को सदन की परंपरा का पालन करना चाहिए।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अविश्वास प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "जब आएगा तो हम आपको बताएंगे।" कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "हम बजट पर बोलने आए थे, लेकिन अब लग रहा है कि सरकार और स्पीकर संसद की कार्यवाही में कोई दिलचस्पी नहीं रखते।" कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा, "संसद बहस और प्रक्रिया का पालन करने के लिए है। विपक्ष को देश से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए जगह देनी चाहिए। यह अविश्वास प्रस्ताव उसी का हिस्सा है।"

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