क्या 2026 से मिलेंगी नई सैलरी? ToR चर्चा के बाद 8वें वेतन आयोग पर बढ़ी बेचैनी

बिज़नेस

नई दिल्ली 
सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए। हालांकि, इसके साथ ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी और पेंशनर यूनियन का आरोप है कि ToR में उस तारीख का जिक्र ही नहीं है, जिस दिन से आयोग की सिफारिशें लागू होंगी, जबकि 4th से 7th वेतन आयोग तक सभी की सिफारिशें हर 10 साल में 1 जनवरी से लागू होती रही हैं। यही कारण है कि अब आशंका जताई जा रही है कि 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग को लागू करने की परंपरा टूट भी सकती है।

7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है। अब तक माना जा रहा था कि 8वां वेतन आयोग स्वाभाविक रूप से 1 जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा। लेकिन ToR में यह तारीख शामिल न होने से प्रश्न उठने लगे हैं। यूनियन और पेंशनर समूहों का कहना है कि भले ही सिफारिशें देरी से आई हों, लेकिन लागू होने की प्रभावी तारीख हमेशा 1 जनवरी ही रही है। इस बार तारीख का उल्लेख न होना एक संभावित नीतिगत बदलाव या देरी का संकेत माना जा रहा है।

कौन कर रहा है विरोध?
ToR जारी होते ही कई कर्मचारी और पेंशनर संगठन सक्रिय हो गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF), कन्फेडरेशन ऑफ़ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ऐंड वर्कर्स (CCGEW) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS)। इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर ToR में मौजूद 'कमियों' पर आपत्ति जताई है और संशोधन की मांग की है।

BPS की 7 बड़ी आपत्तियां और मांगें
17 नवंबर को भेजे गए विस्तृत पत्र में भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने कई अहम मुद्दे उठाए। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं—

1. 1 जनवरी 2026 की तारीख स्पष्ट तौर पर शामिल की जाए
BPS चाहता है कि ToR में साफ लिखा जाए कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी।
2. 'Unfunded Cost' शब्द हटाया जाए
BPS का कहना है कि इस शब्द से लगता है कि पेंशन सरकार पर बोझ है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पेंशन को पहले ही संवैधानिक अधिकार घोषित कर चुका है।
3. पेंशन समानता और संशोधन के स्पष्ट नियम
सभी पेंशनरों के लिए तिथि की परवाह किए बिना संशोधन का एकसमान सिद्धांत लागू किया जाए, ताकि पुराने और नए पेंशनरों का अंतर खत्म हो सके।
4. OPS–NPS–UPS की समीक्षा
2004 के बाद नियुक्त हुए 26 लाख से अधिक कर्मचारी NPS खत्म कर OPS बहाल करने की मांग कर रहे हैं। BPS चाहता है कि 8वां वेतन आयोग इन सभी प्रणालियों की समीक्षा करे और बेहतर विकल्प दे।
5. GDS और स्वायत्त निकायों को 8वें वेतन आयोग में शामिल किया जाए
ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) को डाक तंत्र की रीढ़ बताते हुए BPS ने उन्हें 8th CPC में शामिल करने की मांग की। साथ ही स्वायत्त और सांविधिक निकायों को भी दायरे में लाने की अपील की।
6. 20% अंतरिम राहत
महंगाई को देखते हुए BPS चाहता है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को तत्काल राहत के रूप में 20% अंतरिम राहत दी जाए।
7. CGHS में सुधार की मांग
BPS ने इन सुधारों की मांग की—
• CGHS को सभी स्वायत्त कर्मचारियों तक बढ़ाया जाए
• जिला स्तर पर नए CGHS केंद्र खोले जाएं
• इलाज कैशलेस और प्रक्रिया आसान हो
• लंबित संसदीय समिति की सिफारिशें लागू हों
BPS ने कहा कि ये सभी मांगें 'जनहित' में हैं।
AIDEF और CCGEW: पेंशनरों को दायरे से बाहर रखने पर कड़ा विरोध

AIDEF ने 4 नवंबर को वित्त मंत्री को पत्र लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 30 साल सेवा दे चुके 69 लाख पेंशनर 8वें वेतन आयोग के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं।”

CCGEW ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा़, “ToR के कई हिस्सों में तुरंत संशोधन की जरूरत है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों के हित सुरक्षित रहें।”
क्या सरकार 10 साल के वेतन आयोग चक्र में बदलाव की तैयारी में है?

सबसे बड़ा सवाल यही है। कर्मचारी और पेंशनरों को लगता है कि तारीख का गायब होना, “Unfunded Cost” का उल्लेख और पेंशनरों को प्राथमिकता न देना…ये संकेत हो सकते हैं कि सरकार पारंपरिक 10-वर्षीय वेतन आयोग चक्र में बदलाव पर विचार कर रही है। सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन विरोध बढ़ता जा रहा है। इससे साफ है कि 8वें वेतन आयोग को 2026 से लागू किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर अभी भी भ्रम बरकरार है।

 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry